प्रत्येक सुबह एक नया दिन होता है और नई सुबह बहुत खूबसूरत होती है ,जो प्रत्येक मनुष्य के जीवन में एक नई जीवन दायिनी संचार लेकर आती है जो कल यानि मंगलवार एक जनवरी के दिन लेकर आयेगी।एक नई सुबह,खूबसूरत शमां ,जिसमें विश्व के तमाम लोग एक दूसरे को नववर्ष की शुभकामनायें देते हुये फूले नहीं समायेंगे ।मेरे द्वारा लिखित यह लेख बीते वर्ष की खट्टी मीठी भूली बिसरी यादों के साथ नये वर्ष के प्रवेश को अगाज दे रहा है।
भारतीय ग्रंथों में लिखा है कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया,उस दिन चैत्र शुदी प्रथम रविवार था। एक जनवरी जिस दिन हमलोग नववर्ष मनाते हैं का कारण और मान्यता है कि जनवरी महीने का नाम रोमन देवता 'जानूस' के नाम यानि जिसका एक मुख आगे की ओर तथा दूसरा मुख पीछे की ओर था जिससे उसे बीते हुए कल तथा आने वाले कल के बारे में पता था जिसके कारण एक जनवरी को ही पूरे विश्व में नववर्ष का जश्न मनाया जाता है ।
प्रत्येक मनुष्य को जीवन में काम करने के बाद आनंद,मस्ती मनोरंजन इत्यादि की जरूरत होती है ताकि जीवन जीने का मजा ले सके। इसी कड़ी में लोग आज के समय में एक जनवरी को नववर्ष के आगमन के रूप में जीवन की मस्ती लेने के लिये मनाते हैं।31 दिसम्बर के बारह बजे रात्रि का भी लोग बेसब्री के साथ इंतज़ार करते हैं। ज्यों ही 31 दिसम्बर की रात्रि में घड़ी की सुई 12 बजे के पार हुई कि गाँव,शहर होटलों,बियर बार में मस्ती शुरू हो जाती है और फिर एक जनवरी का क्या कहना बच्चे ,बूढ़े,महिला, पुरुष ,अमीर,गरीब सारे लोग बैर भाव भूलकर एक दूसरे को आने वाले कल की शुभकामनायें एक महापर्व की तरह देने लगते हैं। बहुत खुशी की बात है कि आप जीवन की मस्ती लीजिए लेकिन उसी मस्ती लेने में लोग मांस एवं मदिरा पान करना जीवन की अहम् पहलू मान लेते हैं और मांस मदिरा का सेवन करने वाले अपने आप का नियंत्रण खोकर नये वर्ष के खुशी के पल को मनहूस दिन में बदल देते हैं जो आपकी शुभकामना को अशुभ बना देती है । इसलिए एक शिक्षक होने के नाते मेरी यह शुभकामना है कि नये वर्ष को शुभ दिवस के रूप में मनाया जाय । साथ ही नववर्ष में आपके जीवन को नई नई तरक्की मिले।
अंत में आने वाला वर्ष सुख, शांति,आनंद, समृद्धि ,खुशियों भरा हो ,ईश्वर से मेरी यही प्रार्थना के साथ नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।
आलेख साभार-श्री विमल कुमार "विनोद"
शिक्षक,बांका(बिहार)

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