आदमी रोटी आउ जिनगी - श्री विमल कुमार - Teachers of Bihar

Recent

Tuesday, 8 November 2022

आदमी रोटी आउ जिनगी - श्री विमल कुमार

मगह क्षेत्र के सुन्नर रचना के लिखे के कोशिश कर रहल हिये। एक अइसन निबंध जेकरा ई बतावे के कोशिश कइल गेल हथ कि आदमी मूल में जानवर हे।आदमी आउ जानवर के तुलना करइत ऊ कहऽ हथ कि बहुत माने में जानवरे आदमी से अच्छा हे।काहे कि ऊ नमकहराम न होवे।पशु आदमी के नेह पाके जरूरत से जादा ओकर उपकार कर हे, परन्तु आदमी अपन स्वार्थ में अंधा हो जाहे।आदमी उपकार के भूल के ऊ कृतघ्नता आऊ बेहयाई पर उतर आवऽ हे।एतने न, ऊ अपन पाशविक कृतघ्नता आऊ बेहयाई के डींग हाँके के गौरव मानऽ हे। आदमी के करम आउ विचार में एतना बड़ा अन्तर के मूल कारण हे एकांत सुख भोग के प्रवृत्ति।जीवन के सारा सुख हम उनकरा से छिपा के हम भोगल चाहऽ ही कि दूसरा कोई हमर सुखभोग में सरीक इया हिस्सेदार न होवे। एकरा में कोई इ दू राय न हे कि रोटी हर आदमी के जिन्दगी के बड़ी महत्वपूर्ण जरूरत हे बाकी रोटी जीवन के पर्याय न हे।

जीवन चेतना के प्रवाह हे,आऊ चेतना केवल रोटी के उपज न हे।भले ही रोटी चेतना के विकास में अहम भूमिका निवाह हे किन्तु ओही सब कुछ न हे।चेतना ही व्यक्ति  राष्ट्र आउ संसार में एकता लाके शांति,सौहार्द,स्नेह आउ मंगल के विधान कर सकऽ हे।  रोटी सदा से संघर्ष के मूल कारण हे,बाकी ओकर बुनियादी सवाल आदमी के उहाँ ले जा के खड़ा कर दे हे,जहाँ आदमीयत के पहचान खो जा हे। स्वार्थ में अंधा होके लोग सत्ता आऊ सक्ति (शक्ति) के तारा बुलंद करे लग हे।शांति,आनंद आऊ मंगल के धुन भुला जा हे।

अंत में हम इ कह रहल हे कि रोटी बंधन हे,चेतना मुक्ति।रोटी आदमी के शाश्वत चेतना न दे सके हे,परम कल्याण के रास्ता न बना सके,चेतना ऊ काम के पूरा कर सके हे।ई तरह हम बोल सकऽ रहल हिये कि चेतना में जीए वाला आदमी हरेक में अपना के आऊ अपना में हरेक के देखऽ हे।

 ई आलेख के लेखक के जिनगी में मगही से एम•ए•करे के मौका मिलल हथऽ जेकरा पढ़ के एकर लेखक के बहुत मजा आइल हे जेकरा उ अपन लेखनी से साझा करे के कोशिश कइलन हे।


आलेख साभार-श्री विमल कुमार

"विनोद"प्रभारी प्रधानाध्यापक राज्य संपोषित उच्च विद्यालय

पंजवारा,(बाँका)

1 comment:

  1. मगही में लेख प्रकाशित करे के हम टीचर्स ऑफ बिहार के बहुत-बहुत बधाई दे रहल हिये।

    ReplyDelete