एक मनोविश्लेषणात्मक लेख।
बाल विकास मनोविज्ञान के अंतर्गत बच्चा जब जन्म लेता है तो सबसे पहले वह रोना,चूसना तथा कपड़ा गीला करना जानता है।धीरे-धीरे बच्चा जब बड़ा होता जाता है तो उसमें बहुत सारे गुणों का विकास होने लगता है तथा उसमें शारीरिक,मानसिक, संवेगात्मक ,संज्ञानात्मक तथा शैक्षणिक विकास होने लगता है।
बच्चों में आयु के बढ़ने के साथ- साथ भय,क्रोध,घृणा,खुशी,दुःख आदि संवेगों का विकास होने लगता है।इसी दरम्यान यह देखा जाता है कि तीन-चार महीने की आयु में कई स्पष्ट संवेगों का विकास हो जाता है जिसमें "दुःख तथा आनंद के संवेग" मुख्य हैं।
मुस्कुराहट एक भाव है,जिससे किसी के मन की खुशी के भाव का इजहार होता है।लोगों को जब किसी भी बात की खुशी महसूस होती है तो वह आंखों ही आंखों में मुस्कुराता है तथा जीवन का सही आनंद लेता है।
जीवन सुख-दुःख का संगम है।दोनों के मिलन से ही लोगों को जीवन का वास्तविक मजा मिल पाता है।"मुस्कुराहट से तनाव कम होती है।" "मुस्कुराहट अपने प्रियजन के मिलन से होती है"।जब किसी प्रिय का दर्शन होता है तो लोगों के चेहरे खिल जाते हैं।मुस्कराहट तभी आती है,जब खुशी का इजहार हो और जब खुशी का इजहार होगा तब कोई व्यक्ति लंबी और स्वस्थ जीवन जी सकता है।मुस्कुराते रहने से रोग-शोक से मुक्ति मिल सकती है।
जो मनुष्य जीवन में उदास रहता है ,जिन्दगी उसके लिये नागिन सा रूप धारण करके डंसने लगती है।मुस्कुराहट मित्रों,परिवार के सदस्यों के साथ मिलने,सदकर्म करने तथा असहाय की सेवा करने जिसमें कि आपको भी सुख प्राप्त हो से मिलती है।मुस्कुराहट अचानक चेहरे पर उत्पन्न होने का भाव है जो कि किसी व्यक्ति के अंदर की बात को अभिव्यक्त करता है।यह भी कहा गया है कि
"जीवन की लंबी आयु के लिये मुस्कुराइए"।
"मुस्कुराहट एक भाव है,जिससे किसी के मन की खुशी के भाव का इजहार होता है"।लोगों को जब किसी भी बात की खुशी महसूस होती है तो वह आंखों ही आंखों में मुस्कुराता है तथा जीवन का सही आनंद लेता है।
मुस्कुराहट से तनाव कम होती है।मुस्कुराहट अपने प्रियजन के मिलन से होती है।जब किसी प्रिय का दर्शन होता है तो लोगों के चेहरे खिल जाते हैं।मुस्कुराहट तभी आती है,जब खुशी का इजहार हो और जब खुशी का इजहार होगा तब कोई व्यक्ति लंबी और स्वस्थ जीवन जी सकता है।मुस्कुराते रहने से रोग-शोक से मुक्ति मिल सकती है।मुस्कुराहट जीवन का अभिन्न अंग है ।जो मनुष्य जीवन में उदास रहता है ,जिन्दगी उसके लिये नागिन सा रूप धारण करके डंसने लगती है।मुस्कुराहट मित्रों,परिवार के सदस्यों के साथ मिलने,सदकर्म करने तथा असहाय की सेवा करने जिसमें कि आपको भी सुख प्राप्त हो से मिलती है।"मुस्कुराहट अचानक चेहरे पर उत्पन्न होने का भाव है" जो कि किसी व्यक्ति के अंदर जीवन जीने को उत्प्रेरित करता है।
"मुस्कुराहट जीवन जीने की एक संजीवनी है"।मुस्कुराहट जीवन के लिये ऑक्सीजन रूपी प्राणवायु है।मुस्कुराहट विकास की एक धारा है,जिस धारा में लोग जीवन का सही आनंद ले सकते हैं।जिसके जीवन में मुस्कुराहट नहीं है,सर्व संपन्न होने के बाबजूद भी मरघट की तरह जीता है।इसलिये जीवन में मुस्कुराइये,उसका आनंद लीजिये और लंबी आयु जीने का आनंद उठाइये।
आलेख साभार-श्री विमल कुमार
"विनोद"प्रभारी प्रधानाध्यापक राज्य संपोषित उच्च विद्यालय पंजवारा बांका


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