ख्वाब हो या तुम कोई हकीकत- श्री विमल कुमार - Teachers of Bihar

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Friday, 4 November 2022

ख्वाब हो या तुम कोई हकीकत- श्री विमल कुमार

 एक मनोविश्लेषणात्मक लेख।

बच्चा जन्म लेने के बाद से लगातार परिवार तथा समाज के हम उम्र बच्चों के साथ पढ़ते- खेलते धीरे-धीरे बड़ा होता जाता है।बच्चे जब हम उम्र मित्रों के साथ खेलते हैं तो उनको जीवन का अलग सुख प्राप्त होता है,जिसका आनंद वह अपने जीवन में लेता ही रहता है।

मेरा यह आलेख"ख्वाब हो या तुम कोई हकीकत"मनुष्य के चिंतन, सोच,कल्पना,ख्वाब पर आधारित है।चिंतन,ख्वाब या दिवास्वप्न एक ऐसी मानसिक क्रिया है,जो सभी प्राणियों में होता है।चिंतन के कारण ही लोग आज घर बैठे विश्व समुदाय के लोगों से बातचीत कर लेते हैं। चिंतन का अर्थ"सोचना" है,जो कि प्रत्येक चिंतनशील तथा सृजनशील जीव जीवन में सोचता है।

चिंतन दो प्रकार का होता है- पहला आत्म चिंतन तथा दूसरा यथार्थ चिंतन।

बालक भी जब बचपन में आपस में खेलता है-जिसमें से एक नन्हा सा बालक खेलते क्रम में ईंट की कुर्सी बनाकर उसमें पदाधिकारी की तरह बैठकर एक स्वप्न देखता है,कि वह बड़ा होकर पढ़ाई करेगा।उसके बाद पढ़ाई समाप्त करने के बाद एक बड़ा  पदाधिकारी बनेगा,उसके पास एक सुन्दर सा बंगला होगा,जिसमें एक चमचमाती कार होगी और उस कार में उसकी सुन्दर पत्नी बैठकर सैर करेगी।

यह भी संभव है कि वह बच्चा जो कि खेल-खेल में ईंट की कुर्सी पर बैठकर यह सोचता हो कि जीवन में बड़ा होकर वह पदाधिकारी बनेगा।मुझे लगता है कि यह उसका आत्म चिंतन है। इस आलेख के संदर्भ में इसका लेखक बच्चों की मानसिकता को समझने की  कोशिश करते हुये चिंतन करता है कि यदि बच्चों को परिवार,समाज तथा विद्यालयी स्तर से ही उच्च  मानसिकता तथा सुनहरे स्वप्न दिखाने की कोशिश की जाय तो वह निश्चित रूप से धीरे-धीरे जीवन के चरम शिखर को प्राप्त कर लेगा।उस नन्हें से बच्चे के ख्वाब को देखकर लेखक के दिलो-दिमाग पर एक बात याद आ जाती है कि एक गरीब का बच्चा जो कि बचपन से ही जीवन में संघर्ष करके तरक्की के चरम शिखर को प्राप्त करने का प्रयास करता है और वह देश की रक्षा करने के लिये रक्षा सेवा में जाता है,तो लगता है कि जीवन में ख्वाब देखना भी जरूरी है।

जीवन की ऊँचाई को प्राप्त करने के लिये लोगों को जीवन में चिंतन करना तथा ख्वाब देखना आवश्यक है।जब आप ख्वाब देखेंगे,तभी आपके दिलो दिमाग में काम करने की इच्छा होगी,और जब इच्छा होगी तो लोग जीवन में तरक्की करेंगे।इसलिये जीवन में आगे बढ़ने के लिये सुन्दर,सुनहरे, सृजनात्मक तथा सकारात्मक सोच के साथ आने वाली पीढ़ी को  प्रोत्साहित कीजिये,ताकि आने वाले कल के नौनिहाल बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सके।

इस प्रकार जब एक बालक की मानसिकता धीरे-धीरे बदलते हुये उसे उच्च पद पर ले जाकर बैठा देता है,तभी वह हकीकत में बदल जाती है।हम लोगों को बच्चों को जीवन में अच्छा करने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये ताकि साधारण तथा गरीब गुरवा परिवार के बच्चे भी जीवन में आगे बढ़कर उच्च पदों को सुशोभित कर सके।


आलेख साभार-श्री विमल कुमार "विनोद"

प्रभारी प्रधानाध्यापक राज्य संपोषित उच्च विद्यालय पंजवारा,बाँका(बिहार)।

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