सफल जीवन- श्री विमल कुमार - Teachers of Bihar

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Sunday, 6 November 2022

सफल जीवन- श्री विमल कुमार

एक मनोविश्लेषणात्मक लेख।

संसार की सभी योनियों में मनुष्य योनि सबसे श्रेष्ठ योनि मानी जाती है,जिसे पाने के लिये मनुष्य के साथ-साथ देवता भी लालायित रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि"मनुष्य एक विवेकशील,सामाजिक प्राणी है,जो कि इसको अन्य जीवों की श्रेणी से अलग करता है।हम मनुष्य योनि में जन्म लिये हैं,इसलिये जीवन में अच्छा काम करना चाहिये,क्योंकि इसके बिना जीवन अधूरी रह जायेगी।अच्छा कर्म करने के लिये हमलोगों को "शिक्षा"प्राप्त करना होगा तथा शिक्षा का अलख जगाना होगा,क्योंकि बिना शिक्षा के हम किसी भी समस्या का समाधान नहीं कर पायेंगे।ऐसा माना जाता है कि जीवन में नित्य नई समस्यायें जन्म लेती ही रहती है और हर समस्या अपने आप में एक समाधान है।साथ ही इस समाधान का एक ही विकल्प है

"शिक्षा"क्योंकि इसके बिना किसी का भी विकास संभव नहीं है। संसार में धन की तीन अवस्था है- "दान,भोग और नाश"। एक शिक्षक होने के नाते जैसा मुझे लगता है कि दान का अर्थ सिर्फ धन,दौलत,रूपया,पैसा ही नहीं है,क्योंकि सभी धन की जननी"शिक्षा" है जो कि धन प्राप्त करने का एक प्रमुख साधन है,उसको दान करना चाहिये बाकी सभी चीज की प्राप्ति करने के सामने आने वाली समस्या अपने आप ही समाप्त हो जायेगी।यह संसार का शाश्वत नियम है कि"सभी मनुष्य मरणशील है"और जब कोई मनुष्य मृत्यु को वरण कर लेगा जो कि अवश्यमभावी है तो फिर हम लोग अपने अर्जित किये गये अनमोल संपत्ति का दान क्यों न करें,क्योंकि कल क्या होगा इसे किसने देखा है।हम कल रहें न रहें बस आपके द्वारा किये गये"शिक्षा दान" ही याद रह जायेगी।

दूसरी अनमोल चीज है,"भोग"एक शिक्षक होने के नाते मेरा मानना है कि हमने जिस शिक्षा को प्राप्त किया है उसका जीवन में खूब उपभोग करना चाहिये।शिक्षा के "भोग का मतलब"है कि हमने जो शिक्षा प्राप्त की है उसको अधिक -से-अधिक परिवार,समाज, विद्यालय,राष्ट्र तथा संसार को समर्पित करते चलें ताकि जीवन को कल पश्चाताप न हो कि मैंने जीवन में अपनी"शिक्षा"रूपी  संपत्ति का जमकर भोग नहीं किया,इसलिये जीवन में अर्जित किये गये"शिक्षा"रूपी धन का जमकर भोग करें नहीं तो यह अंत में धीरे-धीरे नाश की ओर बढ़ता ही चल जायेगा।

अंत में धन की अंतिम दशा जो कि नाश है वह संसार की कटु सत्यता मृत्यु को वरण करने के साथ ही पूरी हो जायेगी। अंत में मुझे लगता है कि जीवन तभी सफल हो सकता है जब आप अपने खुबसूरत"शिक्षा रूपी धन"का सदुपयोग करेंगे नहीं तो जीवन अपनी तबाही पर अफसोस करती ही रहेगी,इसलिये जीवन को सफल बनाने के लिये जीवन के सुनहले पल का आनंद लीजिये,वरना जीवन अधूरी की अधूरी ही रह जायेगी।सुन्दर, उत्कृष्ट जीवन की बहुत सारी शुभकामनाओं के साथ।


आलेख साभार-श्री विमल कुमार

"विनोद"प्रभारी प्रधानाध्यापक राज्य संपोषित उच्च विद्यालय पंजवारा,(बाँका

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