संविधान ही सर्वोच्च है - श्री विमल कुमार - Teachers of Bihar

Recent

Wednesday, 9 November 2022

संविधान ही सर्वोच्च है - श्री विमल कुमार

भारतीय संविधान जो कि विश्व का एक सबसे सुन्दर संविधान माना जाता है,जिसे समावेशी संविधान भी कहा जाता है। विश्व का एक अनोखा संविधान जिसमें विश्व के अन्य देशों से कुछ-कुछ अंशों को चुनकर जोड़ा गया है।

भारतीय संविधान की संरचना के संबंध में भाग एक के अनुच्छेद एक में कहा गया है कि"India that is Bharat shall be a "Union of the State" अर्थात भारत राज्यों का एक संघ होगा"इसके लिये"राज्यों का एक संघ" शब्द का प्रयोग किया गया है न कि"संघ राज्य"। आज संविधान दिवस है यानि 26 नवंबर 1949 ईस्वी को हमारा भारतीय संविधान बनकर तैयार हुआ था,जिसे 26 जनवरी 1950 को पूरे देश में लागू दिया गया।

संविधान का अर्थ"कानूनों का संग्रह"होता है।  भारतीय संविधान की"प्रस्तावना" जिसे हम संविधान की अंतरात्मा भी कहते हैं,जिसमें जोड़े गये एक-एक शब्द हमारे देश की महत्ता का बखान करते हैं,जिसके एक- एक शब्द हमारे देश की अंतरात्मा की कहानी को बयां करता है,जिसमें समता, स्वतंत्रता,न्याय, प्रतिष्ठा,जीवन में अवसर प्राप्त करने की बात की गई है।

भारतीय संविधान की विशेषता का जब आप अवलोकन करेंगे तो आप देखेंगे कि लिखित-अलिखित, कठोर-लचीलापन,संवैधानिक संशोधन के उपबंध,संविधान की सर्वोच्चता,धर्मनिरपेक्षता,एकल नागरिकता,मौलिक अधिकार, मौलिक कर्त्तव्य,विश्व शांति का समर्थक आदि बातें समाहित है।

मेरा यह आलेख जो कि"संविधान दिवस" के अवसर पर प्रस्तुत है जिसमें कहा गया है हमारे देश में  में"संविधान ही सर्वोच्च है"इसका अर्थ है"विधायिका जो कि कानून बनाने का काम करती है,"कोई भी ऐसा कानून का निर्माण नहीं कर सकती है जो कि संविधान की गरिमा पर आघात पहुँचाता हो"और यदि संसद(विधायका)कोई भी ऐसा कानून पारित कर देती है,जो कि संविधान की गरिमा पर आघात पहुँचाता है तो भारत का सर्वोच्च न्यायालय अपने"न्यायिक पुनर्विलोकन के अधिकार के तहत उसे अवैध करार देती है"। इस प्रकार हमारा भारतीय संविधान सर्वोच्च है।

दुर्भाग्य की बात है कि कुछ लोगों के मुंह से यह सुनने को मिलता है कि हमारे देश का कानून गलत है,हमारा संविधान गलत है तो यह दुर्भाग्य की बात है।इसी संबंध में राजनीति शास्त्र के विद्वान लेखक डाॅक्टर पुखराज जैन का कहना है कि"भारतीय संविधान सही परिस्थित में,सही समय में,देश के हालात को देखते हुये  बनाया गया है।अगर कोई व्यक्ति कहता है कि"हमारा संविधान गलत है तो यह उस व्यक्ति का दुर्भाग्य है"।

सबसे खुशी की बात है कि हमलोग अपने-अपने विद्यालय में प्रार्थना के बाद बच्चों से भारतीय संविधान की प्रस्तावना का वाचन करवाते है,जो कि हमारे जीवन का एक प्रमुख भाग है।आगे हम सबों को भारतीय संविधान के प्रस्तावना में अंकित एक-एक शब्द की महत्ता को अंगीकृत करते हुये इसे अक्षुण्ण बनाये रखने का प्रयास करना चाहिए,क्योंकि हमारा भारतीय संविधान विश्व के सभी संविधान से श्रेष्ठ है।


श्री विमल कुमार"विनोद"प्रभारी 

प्रधानाध्यापक राज्य संपोषित उच्च विद्यालय पंजवारा,बांका(बिहार)।

No comments:

Post a Comment