आगमन और विदाई-श्री विमल कुमार"विनोद" - Teachers of Bihar

Recent

Friday, 30 December 2022

आगमन और विदाई-श्री विमल कुमार"विनोद"

एक मनोविश्लेषणात्मक लेख।

जीवन सुख और दुःख के मिलन से बना है।जीवन में इन दोनों ही प्रकार के संवेग की आवश्यकता होती है,जो कि जीवन में अपने आप ही आकर समाहित हो जाता है।जिस व्यक्ति के जीवन में सुख और दुःख का मिलन नहीं होता है, उसको जीवन जीने में मजा ही नहीं आता है।मेरा यह आलेख "आगमन और विदाई"जीवन के सुख-दुःख पर आधारित है।

आगमन-आगमन का अर्थ हुआ आना यानि पदार्पण।जब दुनिया में किसी भी जीव का आगमन यानि जन्म होता है,तो बहुत ही अच्छा लगता है,खुशी का माहौल सा बन जाता है,लोगों का मन प्रफुल्लित सा हो जाता है।इसी पर कहा गया है कि दिल बहल जाता है आपके आ जाने से"। घर  में जब कोई पारिवारिक उल्लास होता है,किसी प्रकार का पर्व  मनाया जाता है,तो लोगों के मन में बहुत उल्लास रहता है।

विदाई-विदाई का अर्थ होता है, जाना यानि जब किसी भी चीज की समाप्ति होने लगती है तो धीरे-धीरे वह विदा होने लगता है,जहाँ पर लोगों के मन में उदासी का माहौल छाया रहता है,इसे ही विदाई कहा जाता है। यह तो प्रकृति का शाश्वत नियम है कि जो जीव जन्म लिया है,उसको मृत्यु को वरण करना ही होगा। इसके लिये सभी लोगों को मानसिक रूप से तैयार रहना ही चाहिये,जिससे हम चाहकर भी दूर नहीं भाग सकते हैं।इसलिये प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में अच्छा कर्म करने का प्रयास करना चाहिये,जो कि उसके साथ जायेगा।अच्छे कर्मों का फल हमेशा अच्छा ही होता है,जो कि उसके विदाई की घड़ी में याद रहती है। 

मेरा यह आलेख विशेषकर सेवा में योगदान करना,पदभार ग्रहण करना,स्थानान्तरण होना,सेवा से अवकाश प्राप्त करना तथा इस जहाँ से विदा होने वाले दुखदायी पल पर आधारित है।सारे चीजों में देखा जाता है कि जब मनुष्य जन्म लेता है तो बहुत आनंद आता है,घर में खुशियों के दीप जलाये जाते हैं,उमंगों की बारिश सी  होने लगती है,लेकिन जब लोगों को मृत्यु को वरन् करना पड़ता है तो मानो परिवार में विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ता है,

जिसे लोगों को झेलना ही पड़ता है।उसी प्रकार जब लोग किसी जगह अपने पद पर रहते हुये अपनी सेवा देते हैं और बाद में जब स्थानान्तरित होकर दूसरे जगह जाना पड़ता है तो फिर कुछ समय के लिये वहाँ गुजरे जीवन की खट्टी-मिठी यादें साथ रह जाती हैं।कुछ पल के लिये उदासी छायी रहती है,लेकिन फिर बाद में लोग अपने आप को समयपरिस्थिति के अनुसार समायोजित कर लेता है।लेकिन लोगों के द्वारा की गई उनकी कृति याद रह जाती है। हमलोग समाज में देखते हैं कि जब लड़की की शादी होती है तो घर में उल्लास के सा माहौल बना रहता है,सभी लोग जीवन के आनंददायक पल में समाये रहते हैं,दूल्हे राजा तथा बाराती के आने का इंतजार रहता है,लेकिनषजैसे ही शादी होती है।उसके बाद बेटी की विदाई की घड़ी आती है, लोग कुछ देर के लिये भावनात्मक रूप से उदासी के माहौल में समा जाते हैं,फिर बाद में लोग धीरे-धीरे अपने आपको  परिस्थिति से समावेश करने लगते हैं।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि जीवन में सुख और दुःख,मिलन और जुदाई,आगमन और विदाई का समावेश होता ही रहता है,बस याद रह जाती है।इसलिये जीवन का सुन्दर तथा खुबसूरत मजा लेने के लिये सुख के साथ-साथ दुःख के भी जीवन में आनंद उठाते हुये जीवन के पल का तनाव रहित होकर मजा लें।


आलेख साभार-श्री विमल कुमार"विनोद"

प्रभारी प्रधानाध्यापक राज्य संपोषित उच्च विद्यालय पंजवारा,बांका(बिहार)।

No comments:

Post a Comment