मकर संक्रांति और इसके विविध स्वरुप- सुरेश कुमार गौरव - Teachers of Bihar

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Friday, 13 January 2023

मकर संक्रांति और इसके विविध स्वरुप- सुरेश कुमार गौरव

भारतीय पर्व त्योहारों की अपनी ही विशिष्टता और पहचान है.अंग्रेजी के प्रथम जनवरी महीने की 14 तारीख को सम्पूर्ण भारत में मकर संक्रान्ति विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। विभिन्न प्रान्तों में इस त्योहार को मनाने के जितने अधिक रूप प्रचलित हैं उतने किसी अन्य पर्व में नहीं.आईए भारत के राज्यों में यह पर्व किस रुप में और किस तरह मनाया जाता है,जानते हैं।

  हरियाणा और पंजाब 

पंजाब और हरियाणा में  इसे 13 जनवरी को लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है। यहां के लोग इस दिन अंधेरा होते ही आग जलाकर अग्निदेव की पूजा करते हुए तिल, गुड़, चावल और भुने हुए मक्के की आहुति देते हैं। इस सामग्री को तिलचौली कहा जाता है। इस अवसर पर लोग मूंगफली, तिल की बनी हुई गजक और रेवड़ियां आपस में बाँटकर खुशियाँ मनाते हैं।  बेटियाँ घर-घर जाकर लोकगीत गाकर लोहड़ी माँगती हैं। नई बहू और नवजात बच्चे(बेटे) के लिये लोहड़ी का विशेष महत्व होता है। इसके साथ पारम्परिक मक्के की रोटी और सरसों के साग का आनन्द भी उठाया जाता है।

 उत्तर प्रदेश

भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में यह मुख्य रूप से 'दान का पर्व' है। इलाहाबाद में गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम पर प्रत्येक वर्ष एक माह तक माघ मेला लगता है जिसे माघ मेले के नाम से जाना जाता है। १४ जनवरी से ही इलाहाबाद में हर साल माघ मेले की शुरुआत होती है.१४ दिसम्बर से १४ जनवरी तक का समय खर मास के नाम से जाना जाता है। ऐसा विश्वास है कि १४ जनवरी यानी मकर संक्रान्ति से पृथ्वी पर अच्छे दिनों की शुरुआत होती है। समूचे उत्तर प्रदेश में इस व्रत को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है तथा इस दिन खिचड़ी खाने एवं खिचड़ी दान देने का अत्यधिक महत्व होता है।

  बिहार 

हिन्दी भाषी राज्यों में एक बिहार में मकर संक्रान्ति को खिचड़ी नाम से जाना जाता है। इस दिन उड़द, चावल, तिल, चिवड़ा, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का रिवाज और इसका अपना अलग ही महत्त्व है।

 महाराष्ट्र

मराठी भाषी इस राज्य में इस दिन सभी विवाहित महिलाएँ अपनी पहली संक्रान्ति पर कपास, तेल व नमक आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। तिल-गुड़ नामक हलवे के बाँटने की प्रथा भी है। लोग एक दूसरे को तिल गुड़ देते हैं और देते समय बोलते हैं -"तिल गूळ घ्या आणि गोड़ गोड़ बोला" अर्थात तिल गुड़ लो और मीठा-मीठा बोलो। इस दिन महिलाएँ आपस में तिल, गुड़, रोली और हल्दी बाँटती हैं।

 पश्चिम बंगाल

 बांग्ला भाषी इस राज्य में इस पर्व पर स्नान के पश्चात तिल दान करने की प्रथा है. यहाँ गंगासागर में प्रति वर्ष विशाल मेला लगता है। मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। मान्यता यह भी है कि इस दिन यशोदा ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिये व्रत किया था। इसीलिए कहा जाता है-"सारे तीरथ बार बार, गंगा सागर एक बार।"

तमिलनाडु

दक्षिणी राज्यों में से एक इस राज्य में इस त्योहार को पोंगल के रूप में चार दिन तक मनाते हैं। प्रथम दिन भोगी-पोंगल, द्वितीय दिन सूर्य-पोंगल, तृतीय दिन मट्टू-पोंगल अथवा केनू-पोंगल और चौथे व अन्तिम दिन कन्या-पोंगल.इस प्रकार पहले दिन कूड़ा-कर्कट इकठ्ठा कर जलाया जाता है, दूसरे दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और तीसरे दिन पशु धन की पूजा की जाती है। पोंगल मनाने के लिये स्नान करके खुले आँगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनायी जाती है, जिसे पोंगल कहते हैं। इसके बाद सूर्य देव को नैवैद्य चढ़ाया जाता है।उसके बाद खीर को प्रसाद के रूप में सभी ग्रहण करते हैं. इस दिन बेटी और जमाई राजा का विशेष रूप से स्वागत किया जाता है।

असम

असम में मकर संक्रान्ति को माघ-बिहू अथवा भोगाली-बिहू के नाम से मनाया जाता है।

राजस्थान 

राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएँ अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। साथ ही महिलाएँ किसी भी सौभाग्यसूचक वस्तु का चौदह की संख्या में पूजन एवं दान देती हैं। इस प्रकार मकर संक्रान्ति के माध्यम से भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की झलक विविध रूपों में दिखती है। 

हमारा देश भारत में, विविधताओं में भी एकता रुपी भावनाओं पर चलने वाली ये पर्व त्यौहार कुछ न कुछ संदेशे भी दे जाती हैं। जानकारी इकट्ठी कर मकर संक्रांति के बारे में बताया है। हो सकता है कुछ और इसमें विविधताएं हो। यह त्योहार विविधता में एकता का संदेश देता है।

आप सभी को मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई 





सुरेश कुमार गौरव,स्नातक कला शिक्षक,उमवि रसलपुर,फतुहा,पटना (बिहार

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