कण-कण में है भगवान- श्री विमल कुमार "विनोद" - Teachers of Bihar

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Friday, 13 January 2023

कण-कण में है भगवान- श्री विमल कुमार "विनोद"

हमारा भारत वर्ष प्रारंभ से ही वेद,पुराण,पूजा-पाठ,अच्छे  संस्कृति तथा संस्कार का देश रहा है,जहाँ पर सृष्टि के बाद से  नदी,पेड़,पर्वत,जीव-जंतुओं की पूजा अर्चना होती रही है। जहाँ पर मनुष्य तो क्या मंदिरों में पत्थर की मूर्ति,शिवालय में पत्थर के शिवलिंग जिसे लोग सृष्टि का प्रतीक मानकर उसकी पूजा पाठ करने के लिये देवघर,बासुकीनाथ, सोमनाथ,हरिहरनाथ तथा अन्य अनेकों अनेक मंदिरों में उपवास व्रत रख कर दूध,जल,फूल,फल , बेल पत्र,बतासा,लड्डू,धूप-धूमना इत्यादि अर्पित कर अपनी मनोकामना को पूर्ण करने का प्रयास करते हैं।इस कार्य को महिला पुरुष,छोटे,बड़े सभी बहुत आस्था तथा विश्वास के साथ करते हैं।

बहुत सारे धर्म प्रेमी लोग अपने परिवार के सदस्यों के साथ सुलतानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा में डुबकी लगाते हैं  जिससे उनका मस्तिष्क आनंदित और प्रफुल्लित हो रहा था। लेकिन गंगा तट के आसपास फैले कचरे को देखकर बहुत अफसोस हो रही थी कि यदि लोग नदियों को प्रदूषित करना बंद नहीं करेंगे तो भविष्य में पवित्र गंगा सिर्फ नाम मात्र का बनकर रह जायेगी। उसके बाद जब हमलोग सुल्तानगंज गंगा घाट पर अवस्थित श्री श्री108 अजगैबी नाथ मंदिर में महिलाओं को पत्थरों पर दूध,गंगाजल, अगरबत्ती तथा प्रसाद चढ़ाकर पूजा पाठ करते देखा ,तो मैं इस संदर्भ में अंकिता जी से पूछा कि आखिर लोग पूजा पाठ करते  समय पेड़-पौधे,पत्थर ,नदी,भूमि

इत्यादि की पूजा करते हैं,इसका क्या कारण है?इस पर अंकिता जी का कहना था कि कण-कण में  है भगवान तथा इस पर्यावरण में पारिस्थितिकी तंत्र को बचाये रखने के लिये पृथ्वी पर सभी सजीव तथा निर्जीव वस्तुओं के अस्तित्व को बनाये रखने की जरूरत है। शिक्षक के साथ-साथ एक पर्यावरण के संरक्षक होने के नाते  संसार के सभी लोगों से आग्रह है कि पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाये रखने का प्रयास किया जाय।जल,जीवन और हरियाली को बचाये रखने की कोशिश की जाय तभी ईश्वर के द्वारा दी गई सृष्टि सुरक्षित तथा संरक्षित रह सकेगी तथा जनता का कल्याण संभव हो पायेगा की शुभकामनाके साथ आपका ही


आलेख साभार-श्री विमल कुमार "विनोद" शिक्षाविद

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