युवा शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी के जिओंग(Geong) शब्द से तथा संस्कृत के युवान् शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है युवा, युवक, युवती, कम आयु वाला/वाली।
हमारा मन बलवान हैं, तन अत्यंत दृढ़ और मजबूत है, आत्मा(आत्मशक्ति) श्रेष्ठ है तो हम युवा हैं। जो जितना सच्चरित्र होता है, उसकी आत्मशक्ति उतनी ही दृढ़ हौती है।
यदि प्रतिपल हमारे हृदय में उत्साह और ऊर्जा है, यदि हम स्वस्थ(स्वयं में स्थित या आत्मभाव में स्थित), आंखों में सपने, पैरों में गति है तो हम युवा हैं।
यदि हम अपने Health और Physique के प्रति सतर्क रहते हैं, कैरियर के लिए प्रतिबद्ध हैं तो हम युवा हैं।
यदि हमारा व्यक्तित्व और कृतित्व सुन्दर, श्रेष्ठ व उत्तम है तो हम युवा हैं।
यदि हम उच्च से उच्च ध्येय को ही लक्ष्य बनाते हैं, हमारी दृष्टि(vision) ऊंची है, हमारे पास गहन अंतर्दृष्टि है, हमारी अपने मिशन के प्रति निष्ठा और प्रतिबद्धता(commitment) है, तो हम युवा हैं।
यदि हम कर्त्तव्यपरायण, ईमानदार, उदात्त चरित्र व्यक्तित्व हैं, तो हम युवा हैं।
यदि हममें परहित की भावना है, तो हम युवा हैं।
यदि हममें संतुलन और सामंजस्य की क्षमता है, अपने कार्यों को पूर्ण करने के लिए धैर्य, प्रतिबद्धता और दृढ़संकल्प है तो हम युवा हैं।
यदि हममें अपना पुरुषार्थ प्रकट करने की क्षमता है तो हम युवा हैं।
युवा वह है, जिनके विचार ज्ञान-विज्ञानयुक्त तथा नवीन हो, जो सदा नवीनता को धारण किये रहता है।
ईश्वर में आस्था हो, स्वयं में विश्वास हो, देश के प्रति भक्ति हो जिसके, वही युवा है।
......गिरीन्द्र मोहन झा

No comments:
Post a Comment