नवाचारी शिक्षाशास्त्र- कुमकुम कुमारी - Teachers of Bihar

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Monday, 28 November 2022

नवाचारी शिक्षाशास्त्र- कुमकुम कुमारी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 20020 में कहा गया है कि सीखना समग्र, एकीकृत, समावेशी, सुखद और आकर्षक होना चाहिए। समग्र से तात्पर्य है कि हम  विषय वस्तु की जैसी समझ विद्यार्थियों को देना चाहते हैं उसे सम्पूर्ण रूप से यानी आदि से अंत तक विद्यार्थी आत्मसात कर पाने में सक्षम हो। एकीकृत शिक्षा विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को सामान्य छात्रों के साथ पढ़ने की अनुमति देता है जबकि समावेशी शिक्षा विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को विशेष आवयश्कता भी मुहैया कराती है। सुखद से अभिप्राय है कि शिक्षार्थी बिना किसी मानसिक दबाव के आनंदमई वातावरण में सीखे और ये सब तभी संभव है जब शिक्षण पद्धति आकर्षक होगा यानी शिक्षा में नवाचार का प्रयोग होगा।

              नवाचारी शिक्षा - नवाचारी शिक्षा से अभिप्राय स्थापित या प्रचलित शिक्षा प्रणाली में नए व्यवहार अर्थात नवीन विधियों एवं रीतियों का समावेशन।

                शिक्षा में नवाचार की आवयश्कता क्यों? 

शिक्षा एक गतिशील प्रक्रिया है।इसमें अध्यापक और शिक्षार्थी के मध्य अंतःक्रिया होती रहती है और सम्पूर्ण अंतःक्रिया किसी लक्ष्य की ओर उन्मुख होती है।नवाचार के अंतर्गत कुछ नया व उपयोगी तरीका अपनाया जाता है जैसे- नयी विधि,नयी तकनीक,नयी कार्य पद्धति, नयी सेवा आदि।शिक्षण संस्थानों खासकर प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षा को और अधिक अर्थवत्ता प्रदान करने तथा उसे रोचक व आनंदपूर्ण बनाने हेतु नवाचार का प्रयोग शिक्षा के नए प्रतिमानों की स्थापना में सहायक साबित हो रहा है।

जिस प्रकार आवयश्कता अविष्कार की जननी है उसी प्रकार से शिक्षा प्रणाली में बदलाव द्वारा ही विद्यालयों में सीखने की प्रणाली को अधिक रोचक एवं प्रभावी बनाया जा सकता है।नवाचार की आवयश्कता पर बल देते हुए मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक कहते हैं कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है, अब बड़े छोटे को हरा नहीं पाएँगे।अब जो तेज है वे धीमे को हराएँगे।यदि हमें विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति एवं ठहराव को बढ़ाना है तो शिक्षण अधिगम को रोचक एवं आनंददायक बनाना होगा,अन्यथा शिक्षा की परंपरागत प्रणाली से ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ होगी।आनंदमई शिक्षण एक ऐसा उपक्रम है जिसके द्वारा विद्यार्थियों पर बिना कोई मानसिक दबाब डाले सहज तरीके से शिक्षण करवाकर विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाई जा सकती है।

             उल्लेखनीय है कि शिक्षा में नवाचार की भूमिका सर्वोपरि है।शिक्षण, पाठ्यक्रम और शिक्षक शिक्षा के साथ अभिनव होना चाहिए।कक्षाओं की वास्तविक अधिगम परिस्थिति में नवाचार के प्रतिमानों का समावेश अधिगम को अधिक त्वरा दे सकेगा।

           मैं एक प्राथमिक शिक्षा संभाग की अध्यापिका हूँ।प्राथमिक शिक्षा का उद्देश्य बच्चों के विकास की नींव रखना।भारत के 11 वें राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा है कि "रचनात्मकता सफलता की कुंजी है, और प्राथमिक शिक्षा वह है जहाँ शिक्षक उस स्तर पर बच्चों में रचनात्मकता ला सकते हैं"।इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि प्राथमिक शिक्षा शिक्षा से लेकर समाज और कई अन्य क्षेत्रों में जीवन के सभी पहलुओं में बच्चों के विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है।

 मेरे द्वारा शिक्षण में नवाचार का प्रयोग :- मेरा मानना है कि प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों में विषयवस्तु की समझ बनाने में कहानी-कथा विधि,खेल विधि या फिर रचनात्मक कार्य यथा पेंटिंग्स या कागज के टुकड़ों से विभिन्न प्रकार की आकृति या फूल आदि बनवाने से अधिगम अधिक सुगम और सरल हो जाता है और बच्चे काफी उत्साह के साथ कार्य को करते हैं।इसलिए मैं अक्सर उपरोक्त विधियों का प्रयोग पठन -पाठन में करती हूँ।जिससे बच्चे वर्ग में क्रियाशील रहते हैं और पढ़ने में रुचि लेते हैं।विगत माह विद्यालय के बच्चों द्वारा एक हस्तलिखित बाल पत्रिका निकाली गई है जिसमें   बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पत्रिका बहुत ही खूबसूरत बनकर तैयार हुई है।

                  कहानी सुनना और सुनाना बच्चों को बेहद पसंद होता है।प्रेरक कहानियों के माध्यम से बच्चों का नैतिक एवं चारित्रिक निर्माण बहुत ही सहजता पूर्वक किया जा सकता है।किसी भी पाठ को अभिनय या गतिविधि द्वारा सरल व सहज बनाकर प्रस्तुत किया जा सकता है।इसी प्रकार विभिन्न प्रकार के खेल के माध्यम से बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास कर सकते हैं और विषयवस्तु की समझ को सुदृढ़ बना सकते हैं।इन सबके अतिरिक्त विद्यालय में समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर विद्यार्थियों की सक्रियता को बढ़ाने का काम किया जाता है।साथ ही चेतनासत्र में छोटे वर्ग के बच्चों को चेतनासत्र संचालन में सहभागी बनने का अवसर प्रदान कर उनमें आत्मविश्वास को बढ़ाने और बेहतर करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

       इस प्रकार हम देखते हैं कि शिक्षण में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का प्रयोग कर अपेक्षित अधिगम प्रतिफल प्राप्त किया जा सकता है।


                 


  कुमकुम कुमारी

       शिक्षिका

मध्य विद्यालय बाँक, जमालपुर

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