विदाई जीवन का कारूणिक एवं मार्मिक पल- श्री विमल कुमार "विनोद" - Teachers of Bihar

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Friday, 25 November 2022

विदाई जीवन का कारूणिक एवं मार्मिक पल- श्री विमल कुमार "विनोद"

पारिवारिक एवं समाजिक जीवन के मध्य कड़ी में"विवाह"एक  महत्वपूर्ण पल होता है। वैवाहिक संबंध जो कि कई प्रक्रिया से गुजरती है,जिसमें आशीर्वादी, तिलक,वरमाला,समधी-मिलन के बाद कन्यादान,घूँघट,कोहबर के बाद विदाई का सुन्दर एवं मार्मिक  के साथ-साथ माता-पिता के  उत्तरदायित्व का एक सुन्दर पल होता है।

पारिवारिक जीवन की शुरुआत करने का एक आवश्यक कार्य जिसमें लड़की के माता-पिता  का एक प्रमुख उत्तरदायित्व होता है, लड़की के माता-पिता के द्वारा बेटी का सुयोग्य वर चुनकर हाथ पीले कर देना।

हमारे पुरूष प्रधान समाज की एक प्रमुख परंपरा है विवाह के उपरांत अपनी बेटी का विवाह एक सुयोग्य वर देख कर शादी करा देना। बेटी का जन्म परिवार के लिये सुयोग्य वर खोज कर एक सुन्दर वर(दूल्हा) से शादी कर देना।लेकिन दुर्भाग्य वश जब लोग अपनी बेटी को पढ़ा-लिखाकर जब उनके विवाह के लिये योग्य वर ढूंढने जाते हैं और लगातार लड़की के माता-पिता को यह चिंता बनी रहती है कि अपनी बेटी का हाथ पीला जल्दी से कर देना चाहिए।इसी कि चिंता सताती रहती है कि बेटी की शादी कर देनी चाहिये।

इसी संदर्भ में लड़की का जब कन्या दान किया जाता है यानि लड़की(वधु) के माँग पर वर (लड़का)के द्वारा सिन्दूर डाल दिया जाता है,जिसके बाद से दोनों में पति-पत्नी का संबंध बन जाता है।उसके बाद दूल्हा-दुल्हन का संबंध बन जाता है। इसके बाद कोहबर में दोनों को एक साथ बैठाकर लड़का-लड़की में एक दूसरे से परिचय कराया जाता है।कोहबर के समय घरभरी का कार्यक्रम तथा उसके बाद विदाई की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है। आगे विदाई की प्रक्रिया के समय माता-पिता तथा परिवार के अन्य लोग विदाई करते समय जो-जो समान बेटी को देना है,गाड़ी में चढ़ाना प्रारंभ हो जाता है। विदाई के लिये लड़का-लड़की के आँचल को बाँध दिया जाता है। उसके बाद दूल्हा-दुल्हन धीरे-धीरे अपने माता-पिता तथा परिजनों को प्रणाम करते हुये तथा गला मिलकर आगे बढ़ते जा रहे हैं। माँ पिता जी तथा अन्य परिजन जिनको लगता है कि अब मेरी बेटी परायी बनकर अपने पिया के घर जा रही है। दूल्हा बाबूअपनी सासू माता से कहते हैं कि"खुशी-खुशी कर दे विदा कि रानी बेटी राज करे।"

शादी का यह कार्यक्रम ऐसा है जिसमें एक ओर लड़की(वधु)का  अपने माता-पिता से बिछड़ने का गम है तो दूसरी ओर पिया मिलन की खुशी है तो दूसरी ओर लड़की अपने पिया के साथ सासू माता के घर जाने को भी लालायित तथा बैचेन हो रही है। दूसरी एक महत्वपूर्ण बात यह है कि माता-पिता को अपनी बेटी से बिछुड़ने का गम होता हैलेकिन उसे खुशी भी होती है कि हम ने  मानो बेटी के लिये अच्छा घर-वर चुनकर एक सुन्दर एवं उत्कृष्ट कार्य किया है।

 अंत में मेरा मानना है कि विदाई के बाद एक वर को वधू को समझने का मौका मिल जाता है।साथ ही विदाई के बाद वर-वधू पक्ष के सारे लोग कुछ ही समय में अपने आप को एक दूसरे के साथ समावेश कर लेते हैं।वर-वधू का घर-परिवार बसने लगता है।


आलेख साभार-श्री  विमल कुमार 
"विनोद"

प्रभारी प्रधानाध्यापक राज्य संपोषित उच्च विद्यालय,पंजवारा

बांका(बिहार)

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