भारतीय संविधान का महत्व - देव कांत मिश्र 'दिव्य' - Teachers of Bihar

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Saturday, 26 November 2022

भारतीय संविधान का महत्व - देव कांत मिश्र 'दिव्य'

संविधान नियम और कानून का दस्तावेज है। इसका वास्तविक अर्थ कानून के रूप में निर्मित मौलिक नियम और सिद्धांत हैं। यह मूल सिद्धान्तों का एक सुव्यवस्थित समूह है, जिससे कोई राज्य या अन्य संगठन अभिशासित होते हैं। यथार्थ के धरातल पर यदि हम भारतीय संविधान की बात करें तो यह दुनिया का सबसे बड़ा, लिखित और अनूठा संविधान है। देश का सर्वोच्च कानून 'भारतका संविधान' के नाम से जाना जाता है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना के अनुसार - भारत एक सम्प्रभुतासम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य है। लोकतंत्र वह शासन तंत्र है जहाँ जनता सर्वोपरि है। कार्यपालिका, विधायिका तथा न्यायपालिका भारतीय लोकतंत्र के मुख्य अंग हैं।

भारतीय संविधान का निर्माण - भारतीय संविधान को बनने में २ वर्ष, ११ महीने और १८ दिन लगे। इस महत्वपूर्ण कानून की पुस्तक को बनाने का श्रेय डॉ. बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर को जाता है। यों तो भारतीय संविधान का प्रथम वर्णन ग्रामविले आस्टिन ने सामाजिक क्रांति को प्राप्त करने हेतु बताया था। परन्तु बाबा साहेब ने तो संविधान को सुगठित रूप प्रदान कर संविधान का जनक कहलाने का स्वर्णिम गौरव प्राप्त किया। भारत में प्रत्येक वर्ष २६ नवम्बर को संविधान दिवस मनाया जाता है, क्योंकि वर्ष १९४९ में २६ नवम्बर को संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान को स्वीकृत किया गया था, जो आगे चलकर २६ जनवरी १९५० को अस्तित्व में आया।

संविधान का महत्व: यदि हम संविधान की विशेषताओं और महत्व पर गौर करें तो निम्नलिखित महत्व परिलक्षित होते हैं:

* भारतीय संविधान दुनिया के सभी संविधानों से विशाल व अनोखा है।

* यह अंशत: लचीला तथा अंशत: कठोर है।

* यह संविधान कई संविधानों का सम्मिश्रण है।

* इसमें अन्य देशों की अच्छाइयों को अपनाया गया है। उदाहरणस्वरूप - मौलिक अधिकार को संयुक्त राज्य अमेरिका तथा मौलिक कर्त्तव्य को रूस के संविधान से  अपनाया गया है।

* यह एक संघीय संविधान है।

* इसमें एकात्मक और संघात्मक दोनों गुणों का समावेश है।

* हमारा संविधान सभी को अवसर व जीवन की समानता का अधिकार प्रदान करता है। यह हमारे अधिकारों को सुरक्षित रखता है।

* यह हमें मूल अधिकार तो प्रदान करता ही है साथ ही कर्तव्यों की शिक्षा भी प्रदान करता है।

* हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष है। तात्पर्य है कि यहाँ सभी धर्मों को समान रूप से स्वतंत्रता है। यानि यह धर्म- निरपेक्ष राज्य की स्थापना करता है।

* हमारा संविधान एकता और राष्ट्रवाद के आदर्श को बढ़ावा देता है।

* यह हमें आर्थिक और व्यक्तिगत तौर पर मजबूती प्रदान करता है।

* यह लोककल्याणकारी राज्य की स्थापना व उद्देश्य पर बल देता है।

* यह राज्यों के नीति- निर्देशक तत्वों की व्यवस्था करता है। इसे आयरलैंड के संविधान से अपनाया गया है।

*  इसमें हर नीति, अधिकार और कर्तव्य का समावेश है।

     इस प्रकार निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि भारतीय संविधान स्वयं में अनूठा है। परन्तु संविधान में कानून की गंगोत्री ठीक से बहे, इस हेतु कानून में संशोधन की आवश्यकता है। यदि हमारे रहनुमा, नेता तथा अन्य लोग संविधान के बताए मार्ग पर ठीक से चलें तथा जनकल्याणकारी कार्यों को सम्यक् अमलीजामा पहनाएँ तो लोकतंत्र की आत्मा 'संविधान' पवित्र और हमारा देश स्वर्ग बन जाएगा।





देव कांत मिश्र 'दिव्य' 

मध्य विद्यालय धवलपुरा, सुलतानगंज, भागलपुर, बिहार

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