लालच और शांति- श्री विमल कुमार"विनोद" - Teachers of Bihar

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Sunday, 27 November 2022

लालच और शांति- श्री विमल कुमार"विनोद"

एक मनोविश्लेषणात्मक लेख।

"लालच"का साधारण अर्थ है किसी भी चीज को अधिक से अधिक प्राप्त करने का प्रयास करना,अर्थात जिस चीज को प्राप्त करने के बाद भी संतुष्टि न हो।लोग अपने जीवन में इच्छा शक्ति को कम नहीं कर पाते हैं और अधिक-से-अधिक संपत्ति कमाने की ओर ध्यान देते हैं। जबकि "शांति" का अर्थ होता है तनाव मुक्त जीवन व्यतीत करते हुये आनन्ददायक जीवन जीना। शांति में लोगों को जीवन में कम- से-कम सुख-सुविधा में ही जीवन के आनंदमय पल को जीने की लालसा होती है।लोग तनाव मुक्त जीवन के साथ सुखमय जीवन जीने का प्रयास करते हैं।

"लालच"जीवन में मनुष्य जब अधिक संपत्ति कमाने के हवस का  शिकार हो जाता है तो उसे सिर्फ धन-संपत्ति,रूपया,वैभव कमाना ही जीवन का एक प्रमुख साधन हो जाता है।उसके जीवन का एकमात्र लक्ष्य अधिक-से-अधिक धन कमाना ही रह जाता है।इसी धन को अर्जित करने के लिये लूटपाट करना,ठगना,दूसरे की संपत्ति को हड़ापने का प्रयास करना आदि चीज होती है।लोग अपनी लालच को नहीं रोक पाने के कारण बहुत हद तक गलत काम को भी अंजाम देने का प्रयास करते हैं।अपनी लालच को नहीं रोक पाने के कारण लोग अपनों की क्षति किसी भी हद तक करने को तैयार हो जाते हैं।

समाज में छीना-झपटी का आलम पैदा कर देना,अपनों के जानमाल की हानि पहुँचा देना,दूसरों के धन को लूट लेना ही लालच की चरम परिणति मानी जाती है।लोग अपने लालच को अंजाम देने के लिये निम्न-से-निम्न स्तर का भी काम करने से बाज नहीं आते हैं, जो कि लालची लोगों के जीवन में एक काला धब्बा है। जबकि"शांति"का अर्थ होता है "आराम तथा चैन की जिन्दगी जीने का प्रयास करना"। बहुत सारे लोग ऐसे भी होते हैं,जो कि जीवन में कम प्राप्त करके भी सुख-शांति तथा तनाव मुक्त जीवन जीने का प्रयास करता है।

लोग साधारण तरीके से जीवन जीना चाहते हैं,जहाँ पर अधिक संपत्ति कमाने की ललक नहीं रहती है।लोग जब अधिक संपत्ति कमाने के बाद मानसिक तथा शारीरिक रूप से अधिक तनाव में रहता है,तो वह एकांत जीवन जीने के लिये कहीं सुनसान जगह में चला जाता है,जहाँ उसके दिल को सुकून मिलता है।शांति से जीवन व्यतीत करने का एक अलग आनंद है,लेकिन जिसकी नीयति जैसी बन गई है,वह उससे समझौता कर पाने में असमर्थ है।

आज बहुत सारे लोगों की नियति सी हो गई है कि वह सरकारी सेवा या निजी सेवा में जहाँ भी उसे मौका मिलता है, वह नायजायज ढंग से कमाने से बाज नहीं आता है।चाहे विधायिका के लोग हों या कार्यपालिका के जिनको भी मौका मिला फाइल के नीचे मोटी- मोटी रकम लेकर जेल तक की हवा खाने से भी बाज नहीं आते हैं।मुझे लगता है कि इस पर्यावरण  को लूटने तथा नदियों के अस्तित्व को मिटाने के लिये बालू का अवैध उठाव का धंधा कराने में भी नीचे से उपर स्तर तक के लोगों की भागीदारी से मुँह नहीं मोड़ा जा सकता है।अखबारों की सुर्खियों में प्रतिदिन समाचार छपने के बाद भी जब प्रशासन के द्वारा उसको रोका नहीं जा सकता है तो फिर प्रशासन की बात का क्या कहना?

लेकिन एक सवाल यह भी उठता है कि आप चाहे लालच से जितनी भी संपत्ति कमा लीजिए,लालच की परिणति मानसिक तनाव, अशांति,तबाही ही होगी।इसलिये शांति पूर्ण जीवन व्यतीत करके जीवन का आनंद उठाते हुये मनुष्य योनि के अच्छे कर्मों को करने की कृपा कीजिये ताकि आपका कल का भविष्य सुन्दर, सुखमय और आनंददायक हो सके।


आलेख साभार-श्री विमल कुमार"विनोद"

प्रभारी प्रधानाध्यापक राज्य संपोषित उच्च विद्यालय पंजवारा,बांका(बिहार)।

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