एक मनोविश्लेषणात्मक लेख। किसी भी जीव के जिन्दगी में प्रेम, सहयोग,समन्वय,घृणा,नफरत आदि संवेग का विकास होता है,जो कि अपने आप लोगों के मन-मस्तिष्क में उत्पन्न होते रहता है,जिसको लोग अभिव्यक्त कर देते हैं।ये सारे भाव अपने आप व्यक्त होते हैं।नफरत का अर्थ है किसी के प्रति मन-मस्तिष्क में एक दूसरे के प्रति विरोध का भाव पैदा होना।समाज में भिन्न-भिन्न प्रकार तथा व्यवहार के लोग होते हैं,जिनके व्यवहार से समाज प्रभावित होता है।इन्हीं लोगों में से कुछ लोगों के व्यवहार एक दूसरे के प्रति कष्टदायी होते हैं,जो एक दूसरे के लिये घातक होते हैं तथा एक दूसरे से घृणा,नफरत की भाव फैला देते हैं।
नफरत का बीजारोपण किसी भी व्यक्ति तथा परिवार के साथ हो सकता है।इस नफरत के कई कारण होते हैं,जिसमें परिवार के भीतर अपनों के बीच किसी बात को लेकर मतांतर हो जाना,संदेश की बात उत्पन्न हो जाना जिसके चलते भाई-भाई के बीच नफरत के बीज पैदा हो जाते हैं। बहुत समय एक दूसरे का विचार नहीं मिलने के कारण आपस में नफरत की ज्वाला फैल जाती है। नफरत के कारण लोगों का एक दूसरे से विश्वास उठने लगता है तथा बहुत जगह वैचारिक मत विभिन्नता होने के कारण कई परिवार नष्ट हो जाते हैं तथा बहुत जगह नफरत की ज्वाला में पति-पत्नी तथा भाई-भाई एक दूसरे को छोड़ देते हैं।इसी नफरत की आग में जल कर लोग एक दूसरे की हत्या तक कर देते हैं,फिर बाद में पश्चात् करने से कुछ भी नहीं होने वाला नहीं।इसलिये इस संसार में बहुत मुश्किल से मनुष्य योनि में जन्म हुआ ,जहाँ पर सभी जीवों के साथ सौहार्द पूर्ण व्यवहार कीजिये जो कि इस दुनिया से जाने के बाद यादगार के रूप में रह जायेगी।
नफरत एक मानसिक आघात से संबंधित भाव होती है,जिसके चलते आपस में लोग तनाव में रहते हैं परिवार,समाज,देश-विदेश में लोगों के बीच के संबंधों में दरार देखने को मिलती है। नफरत की आग जल्द मिटती नहीं है,बल्कि दो विचारों के बीच अविश्वास सी पैदा हो जाती है तथा एक दूसरे को शक की निगाह से देखने लगते हैं।शक के कारण वैमनस्यता का आलम फैला रहता है जिसके कारण समाज में बिखराव फैल जाती है, जो कि संपूर्ण विश्व में जान-माल की हानि,विध्वंसक गतिविधियों को जन्म देने में सक्षम होती है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देश के अंदर तथा बाहर कुछ ऐसे तत्व हैं जो देश में जन समुदाय के मन में विद्वेष,मत विभिन्नता,जाति,धर्म,संप्रदाय,अगड़ी-पिछड़ी के नाम पर लोगों के मन- मस्तिष्क में एक दूसरे के प्रति घृणा-भेदभाव का विचार डाले रखते हैं,जिससे कि लोगों का सुख-चैन छीना जाता है।इसी संदर्भ में कहा गया है कि,"नफरत की लाठी छोड़ो लालच का खंजर फेंको ,जिद के पीछे मत दौड़ो मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो"।इसी पर कहा गया है कि "नफरत की दुनियां को छोड़ के प्यार की दुनियां में खुश रहना मेरे यार।इस दूर की नगरी को छोड़ के नाता जा प्यारे अमर रहे तेरा प्यार,खुश रहना मेरे यार।"
अंत में, कहा जा सकता है कि नफरत कभी भी प्रेम को जन्म नहीं दे सकता है।इसलिये दो दिलों के बीच उपजी नफरत की आपस की खाई को तथा मतांतर को कम करके आपसी विचार-विमर्श ,अपने-अपने स्वार्थ को कम करते हुये आपसी तालमेल से नफरत को कम करने का प्रयास करना चाहिये।इसलिये उच्च तथा सकारात्मक सोच को विकसित करते हुये,आपसी बैर-भाव को मिटाकर गले-गले मिलकर जीवन को सुखमय-सौहार्द्र पूर्ण बनाकर जीवन जीने का मजा लीजिए,नहीं तो एक दिन ऐसा आयेगा जब यह नफरत की आग आपको जलाकर राख कर देगी। इसलिये इस भरी दुनियां में अपनों के बीच सुखमय जीवन जीने की कामना के साथ आपका ही-
आलेख साभार-श्री विमल कुमार "विनोद"प्रभारी
प्रधानाध्यापक राज्य संपोषित उच्च विद्यालय पंजवारा बांका(बिहार

No comments:
Post a Comment