सामाजिक प्रताड़ना से मर्माहत शिक्षक समुदाय- श्री विमल कुमार "विनोद" - Teachers of Bihar

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Sunday, 1 January 2023

सामाजिक प्रताड़ना से मर्माहत शिक्षक समुदाय- श्री विमल कुमार "विनोद"

शिक्षक जिसे प्राचीन काल से ही गुरु यानि शिक्षा प्रदान करने वाले कहे जाते हैं,जो कि अपनी संपूर्ण जिन्दगी की कमाई ,बच्चों को सुन्दर,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उसके मंगलमय भविष्य की कामना में लगा देते हैं।प्रतिदिन समय से विद्यालय जाकर बच्चों को कुशल,होनहार और संस्कारिक बनाने का प्रयास करना इनकी नीयति सी बन गई है।लेकिन आज इनको समाज के लोगों ने सम्मानित कम अपमानित अधिक करने का प्रयास किया है,जहाँ इनके उपर  बेटी समान छात्रा के साथ यौन शोषण से संबंधित आरोप लगाकर मानो अपने साथ-साथ संपूर्ण शिक्षक वर्ग के गाल पर जोरदार तमाचा मारा हो।

एक शिक्षक होने के नाते मुझे भी इस बात का अफसोस है कि क्या आखिर हम विद्यालय प्रधान तथा शिक्षक विद्यालय परिसर में अराजकता का माहौल बनने के लिये छोड़ दें,विद्यालय को अनुशासनहीनता के गर्त में डूब जाने दें,छात्र-छात्राओं की गतिविधियों पर ध्यान न दें।इस दरम्यान यदि विद्यालय परिसर में किशोरों पर ध्यान दिये जाने का मतलब विद्यालय प्रधान के द्वारा अपने ही विद्यालय की बेटी समान छात्रा के साथ दुर्व्यवहार तथा यौन शोषण का आरोप लगाकर जेल तक भेजवाने का प्रयास करने वाले ने कभी अपनी गिरेबां में झांक कर देखने का प्रयास किया है कि आपके जैसे अविभावक अपने बच्चे-बच्चियों को बिना गणवेश में  विद्यालय भेज कर उसकी।मर्यादा पर आघात पहुँचाने का प्रयास करते हैं।साथ ही अपनी बच्चियों को वैसे वेशभूषा में विद्यालय परिसर में बहुत गर्व के  साथ ले जाते हैं जो विद्यालय परिसर की गरिमा को आघात पहुँचाता है।

किसी भी व्यक्तित्व के लिये चरित्र बहुत मायने रखता है।यदि चरित्र पर दाग लग जाता है तो दुनिया का सर्वस्व लूट जाता है और फिर किसी विद्यालय के विद्यालय प्रधान जिन्होंने एक सुन्दर,अनुशासन युक्त ,सभ्य तथा संतुलित ढंग से विद्यालय प्रशासन।प्रदान करने का प्रयास किया है उनपर चरित्रहीनता का दोष लगाकर मानो संपूर्ण शिक्षक समुदाय को मानसिक,नैतिक,सामाजिक, मनोवैज्ञानिक रूप से शिक्षा में सुधार नहीं बल्कि गर्त की ओर ले जाने वाली बातों की ओर इंगित किया है।

इसके साथ-साथ सोशल मीडिया वालों कि आदत सी हो गई है वर्ग कक्ष में जाकर शिक्षक तथा शिक्षा व्यवस्था पर आघात सा करने का प्रयास करना। आप प्रेस वालों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी गई है, इसलिये श्रीमान समाचार को प्रकाशित करने से पहले उसकी तह तक पहुँचने का प्रयास करें। साथ ही पुलिस प्रशासन से भी मेरा अनुरोध है कि किसी पर लगाये गये आरोप पर तब तक कारवई न  की जाय,जब तक कि साक्ष्य उपलब्ध न हो जाय।साथ ही झूठा आरोप में फँसाये जाने वाले शिक्षक पर तत्काल किसी तरह की कारवाई पर रोक लगाये जाने के निर्णय एक सुन्दर संदेश के रूप में जाने जायेंगे।जिला प्रशासन इस संबंध में सकारात्मक पहल करने के लिये बधाई के पात्र है।

साथ ही शिक्षक संघ के प्रति भी हम  संपूर्ण शिक्षक समुदाय की ओर से आभार प्रकट करते हैं,जिन्होंने एक निर्दोष विद्यालय प्रधान को बुरे समय में सहयोग किया है।


 आलेख साभार-श्री विमल कुमार "विनोद" 

शिक्षाविद।

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