जीवन की वास्तविकता पर आधारित लेख।
मनुष्य के जीवन में गर्भाधान से लेकर मृत्यु तक सोलह संस्कार होते हैं।जब कोई माता जी गर्भ धारण करती हैं तो परिवार में खुशी का माहौल छा जाता है। उसके बाद परिवार के सभी सदस्यगण आने वाले नवागंतुक के आने की बेकरारी के साथ इंतजार करते हैं।फिर जब बच्चे की जन्म होती है तो परिवार के खुशी का क्या कहना।नये बच्चे के जन्म के बाद मंगल गीत गाये जाते हैं तथा घर में बधैया गायी जाती है।इसके बाद बच्चे की सेवा बहुत सुन्दर ढंग से की जाती है।परिवार के लोग लगातार बच्चे को सुन्दर ढंग से पालन-पोषण करके एक सुन्दर व्यक्तित्व का रूप देना चाहते हैं।धीरे-धीरे बच्चे का परिवार में विकास होने लगता है तथा माता-पिता एवं परिवार के लोग उन बच्चों को सामर्थ्य के अनुसार सारी सुख-सुविधा देने की कोशिश करते हैं।उसके बाद प्रौढ़ावस्था में आकर उसकी शादी किसी नारी से हो जाती है,जहाँ से गार्स्हस्थ जीवन में प्रवेश करने के बाद पति-पत्नी के साथ पारिवारिक जीवन का आनंद उठाते हुये रोजी-रोजगार करते हुये,परिवारिक जीवन भौतिक जीवन का लुत्फ उठाने लगते हैं ।
इसके बाद जिन्दगी में घरेलू जीवन की जीवन लीला को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।फिर धीरे-धीरे इस माया नगरी में जीवन- लीला धीरे-धीरे बढ़ती जाती है।अंतिम अवस्था में जब वृद्धावस्था में पदार्पण होता है तो शारीरिक क्षमता में गिरावट आने लगती है तथा उनको तरह-तरह के कष्टों का सामना करना पड़ता है,तब ईश्वर को अपने कष्ट के लिये कोसते हैं, लेकिन वृद्धावस्था में भी लंबी आयु जीने की लालसा रखते हैं।
मेरा यह लेख "माया नगरी मृत्युलोक की सहज यात्रा" में लेखक का मानना है कि,"सभी लोग तथा जीव मरणशील हैं" साथ ही सबसे अधिक दुर्भाग्य की बात है कि जब लोग अंतिम संस्कार के लिये शव को लेकर शमशान घाट में जाते हैं तब उनको पता चलता है कि,"राम नाम भी सत्य होता है "।फिर भी लोग इस संसार में अपने ही अपनों को लूटने का काम करते हैं तथा जीवन के मुख्य खलनायक की तरह समाज में आतंक का खौफनाक मंजर फैला देते हैं।
आखिर ऐसा क्यों,जरा सा सोचिये कि ऐसा करने से क्या मिलने वाला है? इस माया नगरी,मृत्युलोक में जब आपका आगमन हुआ है तो माया नगरी में अपने सुन्दर,उत्कृष्ट कार्यों की अमिट छाप छोड़कर इस दुनियां से जाइये। पैसा- पैसा,लूट-खसोट,जरा सा के लिये अपनों का खून बहा देना,इस मृत्यु लोक के लिये उपर्युक्त नहीं लगता हैं।
मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद लोगों को जीवन की सुगम यात्रा में सुन्दर-सुन्दर धार्मिक ग्रंथों जैसे रामायण,महाभारत,वेद,पुराण, उपनिषद,कुरान,बाइबिल का अध्ययन करना चाहिये।साथ ही जीवन में बड़े-बड़े ज्ञानी संत- महात्मा के विचारों को आत्मसात करने का प्रयास चरना चाहिये।
इसके अलावे परिवार,समाज तथा आसपास के लोगों के बीच नैतिकता,अध्यात्म,परोपकार, अहिंसा,देशप्रेम,संस्कार युक्त बातों से जुड़े हुये संदेश को प्रसारित करने का प्रयास करना चाहिये।
संसार की सभी योनियों में मनुष्य योनि सर्वश्रेष्ठ रहने के बाबजूद भी माया के चक्कर में अपनों को लूटने,उसका खून बहाने में जरा सा भी रहम नहीं दिखाते हैं।जिस भाई के साथ एक माँ का स्तन पान करने,के साथ-साथ एक बिछावन में सोया तथा साथ में खेलने-खाने के बाबजूद भी उसके खून के प्यासे हो जाते हैं,जो कि इस माया नगरी का कलंक है।जीवन मस्ती के साथ जीने के लिये मिला है,सुन्दर कार्य कीजिए,लोगों का भला कीजिये उत्कृष्ट कर्यों को कीजिये ताकि जिन्दगी जीने का अफसोस न हो की शुभकामना के साथ आपका ही शुभचिंतक-
आलेख साभार-श्री विमल कुमार "विनोद" शिक्षाविद
भलसुंधिया,गोड्डा(झारखंड)।

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