विनाश के लिये उत्तरदायी कौन- श्री विमल कुमार "विनोद" - Teachers of Bihar

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Thursday, 5 January 2023

विनाश के लिये उत्तरदायी कौन- श्री विमल कुमार "विनोद"

चारों ओर तबाही का मंजर,न घर में चैन है और न बाहर सकुन,बस एक ही नाम है पर्यावरण की तबाही। फिर क्या कहना ,जहाँ जाइयेगा, बस मुझे पाइयेगा।संपूर्ण संसार में अधिकाधिक धन,संपत्ति,शान- शौकत ,महाशक्ति बनने की तलाश में बस एक वायरस से संक्रमित होने के भय से लक्ष्मण रेखा केअंदर रहने को मजबूर। कहाँ चली गयी राजशाही,दबंगता, अकड़,अहंकार,लूट,हत्या का आलम,बस कुम्भकार के उस मिट्टी के घड़े की तरह जो कोरोना  वायरस के एक हल्के से झोंके से टकराकर चकनाचूर होकर किसी  चिकित्सक,शोधकर्ता ,वायरस से बचाने के लिये दवा बनाने वाले की राह देखता रहा।लेकिन ठीक वैसी ही बात,"जैसा कर्म करोगे वैसा फल देगा भगवान,यह है गीता का ज्ञान,यह है गीता का ज्ञान।"

प्रकृति का यह शाश्वत नियम है कि जो जन्म लिया है,उसको मृत्यु को वरन् करना ही होगा,जिसकी  अंतिम परिणति कोरोना वायरस के रूप में विश्व जनमानस के पटल पर दिखाई देता है-तबाही हाय तबाही,ठीक वैसी ही जैसे "हाय री मेरी किस्मत,जागने से पहले सो जाती है।"जैसा कि वास्तविकता में देखा जाता कि जब कोई किसी मृत व्यक्ति के अंतिम शव यात्रा में जाता है तो वह कुछ समय के लिये उस जलती हुई चिता को देखकर  महसूस करता है कि सबों की अंतिम परिणति यही होगी,लेकिन  पुनः स्वार्थ की पूर्ति के लिये अपने को दुनिया के दलदल में डूबा कर  पर्यावरण को क्षति पहुँचाना,दूसरे को ठगना तथा अपनी शासन सत्ता को बनाये रखने तथा विश्व के मानचित्र पर महाशक्ति बनने की होड़ में अपनी शक्ति को बनाये रखने के लिये तरह-तरह के विध्वंसकारी अस्त्र-शस्त्र की होड़ में अपने देश की जनता को बेबकूफ बनाने का प्रयास करते हुये कोरोना जैसे वायरस को जन्म देना ही स्वंय अपने महाविनाश की दुखदायी कहानी पर पश्चताप करता हुआ नजर आता है।

     इस पर्यावरण को मनुष्यों ने अपने हितों के लिये लूटा है तथा इसके तबाही का मूल कारण मनुष्य है।इसकी मुख्य समस्या जैसे-नदियों से अवैध बालू का उठाव,सड़कों के दोनों ओर वृक्षों के कटने के बाद पुनः नहीं लग पाना,बरसात के जल का संरक्षण न हो पाना,अंधाधुंध रासायनिक खाद तथा कीटनाशक का प्रयोग किया जाना,पोलीथिन का प्रयोग किया जाना,क्लोरोफलोरो कार्बन का ज्यादा उत्सर्जन किया जाना,अधिक संख्या में पेट्रो केमिकल से चलने वाली गाड़ियों की संख्या में बढ़ोतरी आदि जैसी जटिल समस्याओं की अंतिम परिणति विश्व तबाही के मूल में है।

    आज के समय में किसानों तथा अन्य लोगों के द्वारा पर्यावरण को लूटकर,अपने हित के लिये जनमानस को कृषि के क्षेत्र में तरह-तरह के हानिकारक कीटनाशकों का प्रयोग करके शरीर की रोगरोधक क्षमता को कमजोर कर दिया गया है,जिस कारण कोरोना वायरस के अलावे भी कैंसर,हृदय रोग,चीनी की बिमारी तथा अन्य बहुत से हानिकारक बिमारी को फैलने देने का एकमात्र कारण है तो हमारे जैसे बदनसीब लोग हैं जिन्होंने संपूर्ण सृष्टि को काल के गाल में धकेल कर ही दम लिया है।

अंत में अब भूल जाइये कल की बातों को क्योंकि वह पुरानी हो चुकी है,नये सिरे से कोरोना वायरस से जूझने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा भारत सरकार के द्वारा बताये गये सुझावों को अमल कीजिए वरना विश्व का कोई भी चमत्कार आपके जीवन को बचा पाने में विश्व के मानचित्र पर अपने आपको को निरीह प्राणी की तरह बौना सा महसूस करेगा। हमलोगों को अपने देश को विश्व में होने वाली विनाशकारी परिस्थितयों से बचाते हुये जन कल्याणकारी क्षेत्र में साझेदारी कराने का प्रयास करना चाहिए।  आइये हमलोग सभी मिलकर अपने भारत को समृद्ध बनाने का कष्ट कर अपने,वैभवशाली एवं समुन्नत किस्म का बनाते हुये आपको, घर- परिवार,समाज देश तथा विश्व का इस संकट की घड़ी में साथ देने की कृपा के साथ आपका ही शुभचिंतक।


आलेख साभार-श्री विमल कुमार "विनोद" शिक्षाविद

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