होली रंग-अबीर-गुलाल का उत्सव है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, होली का आरंभ कयाधू-नंदन विष्णुभक्त प्रह्लाद से और उनकी बुआ होलिका के दहन से जोड़कर देखा जाता है। होली में प्राय: तीन भाग होलिका दहन, धुरखेल, रंगोत्सव होते हैं। होलिका-दहन में होलिका के साथ अपने दुख-तकलीफ-आसुरी भाव का दहन कर प्रसन्नता, आनंद और दैवीय भाव की ज्योत जलायी जाती है। धुरखेल में मिट्टी आदि के साथ खेला जाता है। कोई बड़ा-छोटा नहीं, सब एक समान। किसी विदेशी कवि ने लिखा है, "जो बच्चा मिट्टी से नहीं खेलेगा, उसका विकास पूर्ण रूप से नहीं हो सकता ।" फिर रंगोत्सव मनाया जाता है। रंग ही तो जीवन है।- लौकिक और अलौकिक दोनों में। अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा, भक्ति और विश्वास का रंग, बड़ों के प्रति सम्मान का, छोटों के प्रति प्यार का, समकक्षों के प्रति घुलने-मिलने का रंग, मस्ती, खुशियों का रंग, शांति-प्रगति-परोपकार का रंग, साहित्य-संगीत-कला का रंग, हर अच्छाई और अच्छे चीजों, अच्छे मूल्यों का रंग आदि ।साहित्यकार कृष्ण कल्पित के शब्दों में, "दुनिया में सारे त्यौहार मनाये जाते हैं।होली दुनिया का अकेला त्योहार है जिसे खेला जाता है।"पुराणों में राधा और श्रीकृष्ण की होली, भगवान शिव और माता पार्वती की होली प्रसिद्ध है। यह खेल आपसी प्रेम और स्नेह का प्रतीक है।ब्रज की होली भी प्रसिद्ध है। होली- शिव-पार्वती की होली, राधा-कृष्ण की होली मिथिला के संत शिरोमणि बाबाजी लक्ष्मीनाथ गोसाईं जी ने भी कई भजन लिखें है। होली प्रसन्नता, मस्ती, श्रद्धा, बड़ों के प्रति सम्मान, छोटों के प्रति प्यार और समकक्षों के प्रति घुलने-मिलने का उत्सव है। देव, पितर, बडों के चरणों में अबीर चढ़ाकर उनका सम्मान, छोटों के अबीर लगाकर उसे प्यार और आशीर्वाद, समकक्षों से रंग-अबीर खेलना हमारी पुनीत परम्परा है। इस दिन देव-पूजन में प्रसाद के साथ रंग-अबीर का अर्पण ! यह प्रार्थना कि हम सबों के जीवन में प्रसन्नता, श्रद्धा, सम्मान, प्यार, और शांति-प्रगति के रंग-गुलाल सदैव उड़ते रहे !
छोटी-छोटी त्रुटियों को 'बुरा न मानो होली है' कहकर उड़ा देना बड़ी बात है। 'जे जीबे से खेले फाग' कहकर यह बता दिया जाता है कि जीवन, मस्ती, आनंद, उत्सव का ही प्रतीक है। किसी पुराने फिल्म के एक गीत का भाव यह है कि आपके जीवन में खुशियां है तो हर दिन होली, हर रात दीवाली है । सब दुख-तकलीफ, परेशानियों की होलिका का दहन कीजिए और खुशियों का रंग-गुलाल उड़ाइए । आप सभी को रंगोत्सव होली की हार्दिक मंगलकामनाएं !!
गिरीन्द्र मोहन झा, +२ शिक्षक, +२ भागीरथ उच्च विद्यालय, चैनपुर-पड़री, सहरसा
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