बिहार दिवस : इतिहास, संस्कृति और विकास का उत्सव - Teachers of Bihar

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Saturday, 22 March 2025

बिहार दिवस : इतिहास, संस्कृति और विकास का उत्सव

परिचय: हर वर्ष 22 मार्च को बिहार दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन, 1912 में बिहार को बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग कर एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित किया गया था। यह दिवस न केवल बिहार के ऐतिहासिक गौरव को पुनर्स्मरण करने का अवसर है, बल्कि वर्तमान प्रगति और भविष्य के संकल्पों को भी प्रतिबिंबित करता है।

बिहार दिवस सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर बड़े आयोजन के रूप में मनाया जाता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संस्थानों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, प्रदर्शनी, परिचर्चाएँ और प्रतियोगिताएँ शामिल होती हैं।

बिहार का ऐतिहासिक गौरव:

बिहार का इतिहास अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायक रहा है। यह भूमि ज्ञान, धर्म, राजनीति और संस्कृति का केंद्र रही है।

प्राचीन काल में बिहार:

1. ज्ञान और शिक्षा का केंद्र:

नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय विश्व के प्राचीनतम और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल थे।

नालंदा विश्वविद्यालय में 10,000 से अधिक छात्र और 2,000 से अधिक शिक्षक थे, जहाँ चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत जैसे देशों से विद्यार्थी आते थे।

2. बौद्ध और जैन धर्म की जन्मभूमि:

बोधगया में गौतम बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ, जिससे यह स्थान बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया।

महावीर स्वामी ने भी बिहार में जन्म लिया और यहाँ से जैन धर्म का प्रचार किया।

3. प्राचीन साम्राज्य और राजवंश:

मगध साम्राज्य, जिसने चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक जैसे महान शासकों को जन्म दिया।

सम्राट अशोक ने यहीं से अहिंसा और धम्म नीति का प्रचार किया।

गुप्त साम्राज्य, जिसे "भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग" कहा जाता है, बिहार की धरती पर ही फला-फूला।

शेरशाह सूरी, जिन्होंने भारत में डाक प्रणाली, प्रशासनिक सुधार और सड़क व्यवस्था का निर्माण किया, वे भी बिहार से ही थे।

स्वतंत्रता संग्राम में बिहार की भूमिका:

चंपारण सत्याग्रह (1917) से महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ अपनी पहली सफलता पाई।

स्वतंत्रता संग्राम में डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, श्रीकृष्ण सिंह, कुंवर सिंह जैसे वीरों का योगदान अविस्मरणीय है।

1857 की क्रांति में वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ सफल संघर्ष किया और वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले सेनानियों में से एक बने।

बिहार की सांस्कृतिक विरासत:

बिहार केवल इतिहास में ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर में भी समृद्ध है।

लोक कला और परंपराएँ;

मधुबनी पेंटिंग : विश्व प्रसिद्ध यह कला बिहार के मिथिला क्षेत्र से संबंधित है और इसमें प्राकृतिक रंगों से देवी-देवताओं, प्रकृति और सांस्कृतिक प्रतीकों को उकेरा जाता है।

लोकगीत और नृत्य : बिहार के लोकगीतों में सोहर, कजरी, झूमर, बिरहा और भजन प्रसिद्ध हैं।

छठ पूजा : यह बिहार का सबसे महत्वपूर्ण और आस्था से जुड़ा महापर्व है, जो सूर्य उपासना के लिए समर्पित है।

पारंपरिक व्यंजन;

बिहार के स्वादिष्ट व्यंजनों में लिट्टी-चोखा, सत्तू पराठा, खाजा, ठेकुआ, तिलकुट, दाल-भात-चोखा और कई अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल हैं, जो यहाँ की समृद्ध भोजन परंपरा को दर्शाते हैं।

आधुनिक बिहार और विकास:

आज बिहार शिक्षा, उद्योग, कृषि और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है।

1. शिक्षा और प्रतिभा:

बिहार के छात्रों की मेधा पूरे देश में प्रसिद्ध है।

सुपर 30 (एक कुशल शिक्षक व ज्ञान शिल्पी आनंद कुमार की पहल) जैसी संस्थाओं ने बिहार को शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दी है।

IIT, IIM, AIIMS जैसे संस्थानों से बिहार के छात्र देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहे हैं।

2. बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास:

बिहार में नई सड़कें, पुल, रेलवे परियोजनाएँ और औद्योगिक पार्क बनाए जा रहे हैं।

पटना मेट्रो परियोजना, गंगा ड्राइववे, बिहटा औद्योगिक क्षेत्र जैसे बड़े प्रोजेक्ट राज्य की प्रगति में सहायक हैं।

3. कृषि और ग्रामीण विकास:

बिहार भारत का सबसे बड़ा मखाना, लीची और आम उत्पादक राज्य है।

आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को नई दिशा मिल रही है।

बिहार दिवस पर पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, दरभंगा सहित पूरे राज्य में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल हैं:

सांस्कृतिक कार्यक्रम: नृत्य, गायन और नाटक प्रस्तुतियाँ।

प्रदर्शनी एवं मेला: बिहार की कला, हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी।

सेमिनार और कार्यशालाएँ: बिहार के इतिहास, संस्कृति और विकास पर परिचर्चाएँ।

विद्यालयों में विशेष आयोजन: निबंध लेखन, वाद-विवाद और चित्रकला प्रतियोगिताएँ।

बिहार दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि अपने गौरवशाली अतीत, समृद्ध संस्कृति और उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ने का संकल्प लेने का अवसर है।

"बिहार की धरती ज्ञान की खान,

संस्कृति, परंपरा की अनुपम शान।

आओ मिलकर बढ़ाएँ एक कदम,

बिहार बनाएँ सबसे अलग औ उत्तम।"

"बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!"



सुरेश कुमार गौरव प्रधानाध्यापक, उ.म.वि.रसलपुर, फतुहा, पटना (बिहार)

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