सनातन धर्म में प्रत्येक मास की पूर्णिमा किसी न किसी उत्सव के रूप में मनाई जाती है। उत्सव के इसी क्रम में बसंतोत्सव या रंगोत्सव के रूप में फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन होली मनाई जाती है। होली भारतीय जीवन - शैली का अभिन्न हिस्सा है। जिस प्रकार प्रकृति ने हरेक वस्तुओं में रंग भरा है और उसकी सुन्दरता में चार चांद लगाया है, कही न कही हम भी इसी रंगो से प्रेरणा लेकर अपना जीवन को नीरस न रखकर रंगीन बनाते चलें। रंगों का त्योहार होली हमारे देश भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जैसे - जैसे होली का त्योहार नजदीक आता है, लोगों में खासकर बच्चों में इसको लेकर काफी उत्साह नजर आता है। रंगों का त्योहार होली संस्कृति के अनूठे उल्लास को समेटे हुए है। भारतीय संस्कृति हमेशा से विविधता में एकता तथा आपसी भाईचारे का प्रतीक है। इस दिन लोग गिले - शिकवे भूल कर एक - दूसरे को रंग - गुलाल लगाकर प्रेम , भाईचारा और आपसी सौहार्द का संदेश देते हैं। एक - दूसरे के साथ खुशियां साझा करते हैं और छोटे अपने बड़ों से सुभाशीष प्राप्त करते हैं तथा बड़े भी अपना प्यार लुटाते हुए अपनी और अपने परिवार की मंगल कामना करते हैं । होली के पारंपरिक गीत एक माह पूर्व से ही सुनाई पड़ने लगती है। गांवों में अब भी ढोल और मृदंग की धाप सुनाई पड़ती हैं। उत्तर प्रदेश में ब्रज की होली खासकर बरसाने की लट्ठ मार होली तो विश्व प्रसिद्ध है। पकवान में मालपूए और गुझिया का महत्वपूर्ण स्थान है। वास्तव में रंगोत्सव होली हमारे लिए सिर्फ एक त्योहार ही नहीं बल्कि जीवन में भी रंगों की तरह एक उद्देश्यपूर्ण वातावरण तैयार करने की प्रेरणा देती है।
आशीष अम्बर (शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड - केवटी
जिला - दरभंगा (बिहार)
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