होली : इतिहास, धर्म, विज्ञान और आधुनिकता का संगम - Teachers of Bihar

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Friday, 14 March 2025

होली : इतिहास, धर्म, विज्ञान और आधुनिकता का संगम

होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि यह इतिहास, धार्मिक आस्था, वैज्ञानिक तर्क और आधुनिकता का अनूठा संगम है। यह उत्सव प्रेम, भाईचारे और आनंद का संदेश देता है, जो समय के साथ अनेक रूपों में विकसित हुआ है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य :-

होली का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। इसका उल्लेख जैमिनी-महाभाष्य और कात्यायन सूत्र में भी मिलता है। गुप्त, मौर्य और चोल साम्राज्य के काल में होली को 'बसंतोत्सव' के रूप में मनाने के प्रमाण हैं। मुगल काल में अकबर और जहाँगीर के दरबार में भी होली उत्सव का वर्णन मिलता है। यह त्योहार समाज के हर वर्ग को जोड़ने का कार्य करता रहा है।

धार्मिक महत्त्व :-

होली का संबंध भक्त प्रह्लाद की कथा से जोड़ा जाता है, जिन्होंने अग्नि में भी जलने से बचकर यह सिद्ध किया कि सत्य की सदा विजय होती है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसके अलावा, ब्रजभूमि की होली राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम की साक्षी है, जहाँ बरसाना की लट्ठमार होली और वृंदावन की फूलों की होली अनोखी परंपरा को जीवंत करती हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण :-

होली का उत्सव बदलते मौसम का संदेशवाहक है। इस समय जाड़े की विदाई और गर्मी के आगमन के साथ वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया पनपते हैं। होलिका दहन से निकलने वाली गर्मी हवा को शुद्ध करने में सहायक होती है। रंगों में प्रयोग किए जाने वाले टेसू के फूल, हल्दी, चंदन और गुलाल त्वचा के लिए लाभकारी होते हैं।

आधुनिकता और सामाजिक समरसता :-

आज के दौर में होली केवल धार्मिक या पारंपरिक त्योहार न रहकर, एक ग्लोबल फेस्टिवल बन चुका है। भारत में ही नहीं, विदेशों में भी ‘फेस्टिवल ऑफ कलर्स’ के रूप में इसे मनाया जाता है। सोशल मीडिया के दौर में होली की बधाइयाँ डिजिटल हो गई हैं, लेकिन त्योहार की आत्मा प्रेम और सौहार्द में ही बसती है।

प्रेम और एकता का संदेश-

होली हमें जाति, धर्म, ऊँच-नीच के भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे को गले लगाने की प्रेरणा देती है। यह सिखाती है कि रंग किसी एक के नहीं होते, वे सबको समान रूप से रंगते हैं। इसी तरह, समाज में भी प्रेम और भाईचारे के रंग घुले रहें, यही इसका असली संदेश है।

निष्कर्ष:-

होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन है—जहाँ बुराई का अंत, प्रेम का उदय, विज्ञान की पुष्टि और आधुनिकता का समावेश सब एक साथ दिखता है। आइए, इस होली पर हम केवल रंग नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा भी फैलाएँ।

"रंगों की भाषा एक है, प्रेम का संदेश अनेक है,

मिलजुल कर मनाएँ होली, यह त्यौहार विशेष है!"


सुरेश कुमार गौरव, 

प्रधानाध्यापक

 उ. म. वि. रसलपुर फतुहा, पटना (बिहार)




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